PM Awas Yojana। नमस्कार दोस्तों ग्रामीण भारत में हर गरीब परिवार के सिर पर पक्की छत सुनिश्चित करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक और ऐतिहासिक कदम उठाया है, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने देश के 12 राज्यों के लिए ₹10,021.42 करोड़ की भारी-भरकम राशि जारी कर दी है।
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक उच्च स्तरीय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस वित्तीय मदद को मंजूरी दी। सरकार का लक्ष्य मार्च 2029 तक ‘सभी के लिए आवास’ के सपने को पूरी तरह साकार करना है।
इन राज्यों की चमकेगी किस्मत?
केंद्र सरकार द्वारा जारी की गई इस राशि का सीधा लाभ देश के 12 राज्यों को मिलेगा, इन राज्यों में आवास निर्माण के काम में अब अभूतपूर्व तेजी आएगी।
- उत्तर प्रदेश
- राजस्थान
- छत्तीसगढ़
- झारखंड
- असम
- गुजरात
- हरियाणा
- हिमाचल प्रदेश
- कर्नाटक
- केरल
- पंजाब
- तमिलनाडु
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PMAY-G: अब तक का रिपोर्ट कार्ड
बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री ने योजना की अब तक की प्रगति के आंकड़े भी साझा किए, जो इसकी सफलता की कहानी बयां करते हैं।
- ग्रामीण भारत के लिए कुल 4.95 करोड़ घरों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है।
- अब तक 3.91 करोड़ से अधिक मकानों को प्रशासनिक मंजूरी दी जा चुकी है।
- इनमें से 3.05 करोड़ से अधिक पक्के मकान बनकर तैयार हो चुके हैं, जिनमें गरीब परिवार सम्मान के साथ रह रहे हैं।
- वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने पहले ही ₹11,121 करोड़ मंजूर किए थे, जिसके ऊपर अब यह ₹10,021 करोड़ की अतिरिक्त किस्त जारी की गई है।
पारदर्शिता और गति के लिए कड़े निर्देश
इस भारी-भरकम बजट का लाभ बिना किसी भ्रष्टाचार के सीधे हकदार तक पहुंचे, इसके लिए मंत्रालय ने राज्यों को सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
- सीधे खाते में पैसा (DBT): योजना की राशि में किसी भी तरह के बिचौलियों की भूमिका को खत्म कर दिया गया है। पैसा सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) और आधार-लिंक्ड पेमेंट सिस्टम के जरिए भेजा जाएगा।
- जियो-टैगिंग से निगरानी: मकान के निर्माण की हर स्टेज (नींव, लिंटेल और छत) की भौतिक जांच होगी। केवल जियो-टैग्ड तस्वीरों के वेरिफिकेशन के बाद ही अगली किस्त जारी की जाएगी।
- भूमिहीनों को प्राथमिकता: सरकार ने राज्यों से अपील की है कि जिन बेहद गरीब परिवारों के पास मकान बनाने के लिए खुद की जमीन नहीं है, उन्हें राज्य सरकारें प्राथमिकता के आधार पर जमीन का पट्टा उपलब्ध कराएं।
- 30 जून 2026 की डेडलाइन: जिन राज्यों में साल 2024-25 और 2025-26 के आवासों की मंजूरियां अभी भी लंबित हैं, उन्हें 30 जून 2026 तक हर हाल में कागजी कार्रवाई और मंजूरी पूरी करने का अल्टीमेटम दिया गया है।
निष्कर्ष
केंद्र सरकार का यह फैसला न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले गरीबों को पक्की छत देगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा देगा। बड़े पैमाने पर होने वाले इस निर्माण कार्य से स्थानीय स्तर पर राजमिस्त्री, मजदूरों और निर्माण सामग्री (ईंट, सीमेंट, सरिया) के व्यापार को गति मिलेगी, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। ‘सबका साथ, सबका विकास’ के संकल्प को पूरा करती यह योजना ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलने का दम रखती है।